Annaavrutha vayu lakshana: A.Hridaya
Sloka
भुक्ते कुक्षौ रुजा जीर्णे शाम्यत्यन्नावृतेऽनिले|
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सर्वाङ्गसुन्दरी व्याख्या
अन्नावृते वाते भुक्ते सति रुजा कुक्षौ भवति| जीर्णेऽन्ने सति रुजा शाम्यति|
Reference
अष्टाङ्गहृदयम् निदानस्थानम् - १६. वातशोणितनिदानाध्यायः